RAMAYAN POSTS in HINDI

RAMAYAN POSTS in HINDI
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विद्वान परशुराम को नकारात्मक क्रोधित और घोर बदला लेते हुए क्यूँ दिखाते हैं?
https://awara32.blogspot.com/2017/07/avtar-parashram-acts-were-positive.html 

मालूम नहीं क्यूँ संस्कृत विद्वान यह पूरी तरह से गलत सूचना विष्णु अवतार, भगवान् परशुराम जी के बारे में देते है, की क्षत्रियों का उनके पिता के साथ दुर्व्यवाहर के कारण , तथा क्षत्रियों की अन्य उद्दंडता के कारण , उन्होंने इक्कीस बार पृथ्वी को सारे क्षत्रिये मार कर शत्रिय-विहीन कर दिया |
ईश्वर अवतार तो दया के सागर होते हैं, वैसे भी सनातन में यह नियम है कि मानव रूप में प्रभु सदैव यह उद्धारण प्रस्तुत करते हैं कि यदि कोइ मानव ऐसा कार्य करे कि दण्डित करना आवश्यक है, तो मानव के पास इतना ही अधिकार है कि उस व्यक्ति को इतना ही दण्ड दिया जाय जिससे समाज आगे बढ़ता जाए, ना की अपराध के अनुसार ‘उचित दण्ड’ |

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राम कृष्ण ऐतिहासिक अवतार को विद्वान शोषण हेतु कथा में क्यूँ दर्शाते हैं?
http://awara32.blogspot.com/2017/04/ram-krishna-are-historical-figure.html 

अभी हाल में राज्य सभा में माता सीता के जन्म स्थान और उनके वास्तविक अस्तित्व को लेकर कुछ लोगो ने प्रश्न उठाए, जिसका हिन्दू समाज की और से सरकार ने उत्तर दिया कि श्री राम और माता सीता वास्तव में अवतरित हुए थे, और यह आस्था का प्रश्न नहीं है, इतिहास है ! उसी तरह से श्री कृष्ण पर भी प्रश्न उठते रहे हैं, लकिन हिन्दू समाज उनको भी ऐतिहासिक पुरुष और ईश्वर अवतार मानता है | उपरोक्त कथन में कही कोइ संदेह है भी नहीं, होना भी नहीं चाहीये |

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क्या आप अपनी बहन, बेटी या पत्नी को त्याग देंगे, अगर उसका अपहरण हुआ हो?

अपहरण किसी का भी हो सकता है, और यदि अपहरण महिला का हुआ है , तो दोषी अक्सर उस महिला को समाज बना देता है |
श्री राम ने अग्नि परीक्षा जो एक अमानवीय धार्मिक आदेश था उस समय का,

धर्म द्वारा स्त्रियों पर जुल्म करने का, उसको निरस्त करा, अधर्म घोषित करा |
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नाक कट्या बाद रावण ने युद्ध नहीं करा...स्त्री हरण कभी वीरता का प्रतीक नहीं

इस पोस्ट को पढ़ते समय आप यह अवश्य सोचीयेगा की आज के संस्कृत विद्वान और धर्मगुरु रावण को वेद-ज्ञाता और महावीर क्यूँ समाज के सामने स्थापित करना चाहते हैं, जबकी यदि इतिहास बिना अलोकिक शक्ति के पढ़ा जाए तो आप पायेंगे की रावण जिस जिस से लड़ा, उन सबसे हारा, सदा अपमानित होकर बीच-बचाव के कारण ज़िंदा लौट पाया | बस प्रचार उसका अच्छा था, पूरे विश्व के ब्राह्मण उसका साथ दे रहे थे, इसलिए झूठे प्रचार के सहारे वोह आगे बढ़ता गया |
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नीच चालबाज रावण को संस्कृत विद्वान धर्मगुरु वेदज्ञाता क्यूँ बताते हैं?


वेद क्या है?
क्या समाज को गुलाम बना कर रखने के लिए संस्कृत विद्वानों द्वारा एक शास्त्र, या फिर संस्कृत विद्वान और धर्मगुरु वेदों का गलत अर्थ समाज के सामने प्रस्तुत कर रहे हैं, ताकि समाज का शोषण हो सके, जिसके लिए आवश्यक है कि समाज कि मानसिकता गुलामी वाली हो?

और, गुलाम की मानसिकता समाज की रहे, इसके लिए यह आवश्यक है कि समाज को गलत सूचना दी जाय | हिन्दुओ के अवतार का इतिहास तोड़ मरोड़ कर गलत रूप में समाज तक पहुचाया जाए, और जहां संभव हो वहां तथ्यों को छिपा कर गलत इतिहास भी समाज तक पहुचाया जाए !
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श्री राम ने माता सीता को अग्नि परीक्षा पारित करने के लिए कौशल कि शिक्षा दी

सूर्पनखा के अभद्र व्यवाहर के कारण राम को सूर्पनखा को दण्डित करना पड़ा, और अपमानित सूर्पनखा का किस्सा पूरी लंका में चर्चा का विषय बन गया | कैसे खर-दूषण, चचेरे भाई तुरंत इसका बद्ला लेने के लिए राम से युद्ध लड़ने गए, और वीर गति को प्राप्त हो गए, परन्तु रावण कुछ नहीं कर पा रहा है | रावण ना तो इतना साहस जुटा पाया कि वोह राम को युद्ध के लिए ललकारे, ना ही कुछ और विकल्प नज़र आ रहाथा | रावण की छबी लंकामें धूमिल होती जारही थी | उसे कुछ ना कुछ तो करना ही था !

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वेद भौतिक ज्ञान है..द्रोण रावण जैसे अधर्मी और कपटी वेदज्ञाता नहीं हैं

वेद भौतिक ज्ञान है और वर्तमान समाज केन्द्रित है, परन्तु किसी भी संस्कृत विद्वान और धर्मगुरु ने यह बात समाज को क्यूँ नहीं बताई, इसका उत्तर आपलोग खोजिये| कहीं ऐसा ना हो कि आप यह कहें कि भौतिक ज्ञान का अर्थ नहीं मालूम, तो इसका भी स्पष्टीकरण हो जाए | भौतिक ज्ञान का अर्थ है कि जिसका प्रयोग आप अपने जीवन मैं कर रहे हों| यदि एक व्यक्ति कपटी हो, दुराचारी हो तो आप यह तो कह सकते हैं कि इस व्यक्ति ने वेद पढ़ा है , लकिन यह भी निश्चित है कि उसको वेद का ज्ञान नहीं है, क्यूंकि वेद का ज्ञाता कपटी और दुराचारी तो नहीं हो सकता, और अधर्मी तो बिलकुल नहीं हो सकता | जो भी ये गलत बात बता रहाहै, और ज्ञानी भी अपनेआप को बताता है, उसका उद्देश समाज को ठगने का तो हो सकता है, समाज हित बिलकुल नहीं !
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शुद्र का शोषण रहित वेदिक अर्थ बिना अवतार के इतिहास के नहीं मिल सकता

यह सूचना युग है, और समाज को देखीये सूचना होते हुए भी अपना शोषण करवा रहा है| कोइ भी कुछ बता सकता है और बताने वाला व्यक्ति यदि धर्म से जुडा हुआ है, तो गलत सूचना से समाज का कितना नुक्सान होता है यह अनुमान भी नहीं लगाया जा सकता| विडम्बना यह भी है कि सब सबके सामने हो रहा है, यह भी समझ मैं आता है कि गलत हो रहा है लकिन कोइ सुधार का प्रयास नहीं करता, डरते हैं, अपनी कर्महीन मान्सिक्ता के कारण कि कुछ गलत ना होजाए, चुकी धर्म के लोग जुड़े हैं |
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गुरुकुल शिक्षा प्रणाली से भारत क्यूँ नष्ट हुआ, गुलाम बना..चर्चा और विचार

यह पोस्ट गुरुकुल शिक्षा प्रणाली के अंदर महाभारत से पहले से जो दोष आ गए, और जो आज तक हैं, उनको ना सुधार कर गुरुकुल शिक्षा प्रणाली को बिना दोष मुक्त करे अच्छा बताए जाने का विरोध करती है| पोस्ट लिखते हुए अत्यंत कष्ट हो रहा है, क्यूंकि इससे पहले दो पोस्ट शिक्षा पर लिख चूका हूँ, जिसमें भौतिक तथ्यों के आधार पर यह प्रमाणित हो चुका है कि गुरुकुल शिक्षा प्रणाली से भारत नष्ट हुआ, गुलाम बना, लकिन एक ख़ास वर्ग यह अनुभव करने लगता है कि उसको समाज को भौतिक तत्यों से जो सत्य सामने आ रहा है, उसको नक्कारना है, समाज के सामने सत्य को नहीं आने देना है, और यहीं से समस्या बढ़ जाती है ! इस समाज को यह तो समझना होगा कि कोइ भी तथ्य छिपाया नहीं जा सकता , आज सूचना युग है, सबकुछ सामने आएगा ही |
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सीता आँख में पट्टी बांधे, तराजू लिए, न्यायदेवी हैं और इसके प्रमाण हैं

अनेक बार आपने आँख मैं पट्टी बांधे और तराजू लिए हुए न्यायदेवी की तस्वीर देखी होगी, लकिन यह न्यायदेवी कौन है, कोइ नहीं बताता | यूरोप के कुछ देशो मैं इस विषय पर कथाएँ हैं, जो स्वाभाविक भी है , लकिन फिर से इसका मर्म और भेद प्राचीनता मैं कही लुप्त हो गया है | क्या मानक होने चाहीये कि माता सीता या और कोइ और देवी न्यायदेवी कहलाएं और ‘क़ानून अँधा होता है’ इसको दर्शाने के लिए आँख मैं पट्टी बांधे और दुसरे हाथ मैं तराजू उठाए की न्याय में भी, तराजू की तरह, एकदम उचित हिसाब होगा |
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धार्मिक लोग तथा राक्षसों को परशुराम नहीं सुधार पाए इसलिए राम अवतरित हुए

इस प्रश्न का संतोषजनक उत्तर तो समाज को चाहीये कि एक के बाद दोसरे अवतार को क्यूँ अवतरित होना पड़ा| लकिन सबसे पहले यह समझ लें कि अवतार आते क्यूँ हैं? जब ज़ुल्म और अत्याचार हद से ज्यादा हो जाय, और समाज विज्ञानिक दृष्टिकोण से भी विकसित हो तो मनुष्य रूप मैं अवतार अपना पूरा जीवन समाज कि दिशा परिवर्तन मैं लगा देते हैं , जिसके उद्धारण, परशुराम, राम और कृष्ण हैं| श्री कृष्ण के समय मैं जुल्म कितना हो रहा होगा, इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं, कि अभी हाल के १००० साल की गुलामी मैं जब हमलावर लूट मार मचा रहे थे, जबरदस्ती धर्म परिवर्तन कर रहे थे, औरतो को सड़क पर बेईज्ज़त कर रहे थे, मासूम बच्चो को मार रहे थे, तब इश्वर अवतरित नहीं हुए |
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रावण सैन्य रणनीति में अक्षम थावीरता के भी कोइ प्रमाण नहीं हैं

आज तो हमें धर्म चाहीयेक्यूँकी आदिवासी और अशिक्षित बहुत हैं,..राजकुमार भी बहुत हैंलकिन कोइ राजकुमार वन मैं सुधार के लिए नहीं रह रहा .....जिसका एक कारण यह भी है कि हमें सही धर्म नहीं बताए जा रहे हैं !

ऐसा भी प्रतीत होता है कि माया(MIND CONTROL WEAPONS) का प्रयोग श्री राम ने खर दूषण से युद्ध मैं करा थाऔर लंका क्यूँकी समुन्द्र से चारो तरफ से घिरा हुआ देश थारावण ने बहुत अधिक धन सैन्य उपकरणों की आधुनिकरण मैं नहीं खर्च करा था लंका मैं जैमर लगे हुए थेजो की शत्रु की माया का प्रयोग असफल करदेते थेलकिन लंका के बाहर वोह तकनीकी स्तर पर माया के विरुद्ध नहीं खड़ा होना चाहता था खर दूषण का परिणाम वोह देख चूका थाइसलिए उसने लंका मैं बैठ कर युद्ध करने की ठानी|
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भारतीय शिक्षा प्रणाली तथा सामाजिक मूल्यों की शिक्षा मैं आभाव का कारण

भारतीय समाज को यह बताया गया है कि अंग्रेजो के ज़माने मैं एक मेकैउले थे जिन्होंने यह कहा था कि भारत मैं ऐसी शिक्षा प्रणाली पर्याप्त है जो निचले स्तर के सरकारी कर्मचारी उपलब्ध करा सके जब भी शिक्षा की बात होती हैहम इसी बात को लेकर बैठ जाते है विश्वास कीजिये  हमारी शिक्षा प्रणाली कोइ बुरी नहीं हैहां सुधार की गुंजाईश उसमें भी है लकिन वोह सुधार विद्यार्थी को आज के परिपेक्ष मैं रोजगारऔर समाज की अवश्यक्ताओ के प्रति अधिक उपयोगी बनाना है उसके लिए सूचना और आज के उपकरणों की जानकारी और निपुर्नता भी महत्वपूर्ण है सामाजिक मूल्यों की शिक्षा सदा धर्म से मिली है और मिलेगी !
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विभीषण अमर हैंअर्थ मानव मॉस खाने वाले राक्षस प्रलय तक पृथ्वी पर रहेंगे

विभीषण अमर हैंइसका स्पष्ट अर्थ हुआ कि राक्षस जाति कलियुग के अंत तक पृथ्वी पर रहने वाली है |
विभीषण अमर हैंइसका यह अर्थ कदापि नहीं हुआ कि विभीषण त्रेतायुग से अब तक जीवित हैंराक्षसों के राजा हैंइसका सूचना युग मैंशोषण-रहित अर्थ है कि राक्षस जाति कलयुग के अंत तक जीवित रहेगी |

राक्षस उसको कहते हैं जो मानव मॉस खाते हैंउनको भी जो मानव बलि चढाते हैं मानव होने के नाते मुझे उनलोगों के बारे मैं सोचना भी अच्छा नहीं लगता जो मानव मॉस खाते हैंऔर यह प्रश्न भी अनेक बार मेरे मन मैं उठता है कि आखिर क्यूँ इश्वर ने अवतरित होने के पश्च्यात इनका सर्वनाश नहीं करामौका मिलने पर इनको समाप्त नहीं करा 
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श्री राम अवतार हैं या इश्वरया एक आदर्श पुरुष

श्री राम भगवान विष्णु के अवतार हैंजो की पृथ्वी पर उस समय अवतरित हुए जब श्रृष्टि एकदम नकारात्मक दिशा मैं जा रही थी श्री विष्णु श्रृष्टि के पालन करता हैंऔर जब श्रृष्टि की दिशा एकदम नकारात्मक हो जाती हैतो भगवान् को अवतार लेना पड़ता है जरुरी नहीं है कि अवतार जीवन से मृत्यु तक समाज को दिशा निर्देश देते रहे कुछ ऐसी स्तिथी भी होती हैं कि एक बार का हस्ताषेप पर्याप्त होता है |
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उत्तर चाहीयेराम ने सीता के अपहरण को स्वीकृती दी तो वोह कैसे भगवान हैं?

मुझे उत्तर चाहीये !
क्या आप वास्तव मैं यह विश्वास करते हैं कि श्री राम विष्णु अवतार थे ?
मालूम है आपका उत्तर हाँ होगा !
अगर हाँतो आपने यह कैसे मान लिया कि राम ने सीता के हरण को  स्वीकृती दी ?
यह कहने से काम नहीं चलेगा कि राम ने असली सीता को अग्नि देव को इसलिए सौपा क्यूँकी रावण अगर असली सीता को छु भी लेता तो भस्म हो जाता |
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श्री राम मर्यादापुरुषोत्तम क्यूँ कहलाते हैंइतिहास के परिपेक्ष मैं

हिन्दू समाज को इश्वर अवतार श्री राम के समय के इतिहास और विज्ञान की आवश्यकता हैजो की स्वंम हमने अलोकिक शक्ति की चादर मैं छिपा रखा हैउसको भारत की विश्विद्यालय तक भी नहीं पहुचने दे रहेऔर फिर इसके बाद हमसब अपनेआप को शिक्षित और धार्मिक कहते हैं !

नीचे जो भी मैं कहने जा रहा हूँवोह आपसबको आसानी से समझ मैं आएगा क्यूँकी कोइ गूढ़’ प्रयास नहीं करा जाएगा और वैसे भी इतिहास कहानी जैसा होता हैखासकर अगर तारीख याद ना करनी हों |
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क्या रामायण से गलत धर्म सिखाकर मेरे राम को पाखंडी साबित कर रहे हैं  

इतिहास की परिभाषा शुरू से यही रही है कि वर्तमान समाज के हित को ध्यान मैं रख कर तथ्यों की प्रस्तुति | इसका जीता जागता उद्धारण है कि एक ही इतिहास हिंदुस्तान, पाकिस्तान और बंगलादेश का है, लकिन तथ्यों की प्रस्तुति ने तीनो देशों मैं इसका स्वरुप अलग कर दिया है |

एक उद्धरण उपयुक्त रहेगा, आज के सूचना और विज्ञानिक युग मैं यदि समाज को यह बताया जाता है कि हनुमान जी लंका से छलांग लगा कर हिमालय पर्वत पहुचे, तो उसका कोइ उपयोग नहीं है, क्यूँकी मानव तो ४०-५० फूट की छलांग भी नहीं लगा सकता | जी हाँ यदि यह बताया जाता है कि एक विशेष विमान से वे हिमालय गए थे, तो इस विज्ञानिक युग मैं मानव उस विषय पर सोच सकता है, समाज हित मैं कुछ कर सकता है, धर्म का अनुसरण हो सकता है|
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युद्ध मैं रावण की सुगमता से पूर्ण हार के कारण..एक विश्लेषण

जैसा की अन्य पोस्टो मैं भी बताया गया है, रावण एक कुशल राजनीतिगज्ञ और कूटनीतिज्ञ अवश्य था, लकिन वीरता की उसकी सारी गाथा झूटी हैं, और राम रावण युद्ध के परिणाम को देख कर ऐसा भी लगता है की वोह कुशल सेनापति नहीं था, तथा सैन्य अभियानों के बारे मैं उसके पास कोइ निपुणता भी नहीं थी |

बस रावण को स्वांग रचना आता था, ब्राह्मणों मैं उसका प्रभाव था, अनेक झूटी कथाएँ उसकी शिव की सिद्धी की प्रचिलित थी, तथा चुकी लंका समुन्द्र से घिरा देश था, और यह बात तो सत्य थी की राक्षस मानवो का मॉस खाते थे, इसलिए चुकी रावण एक ब्राह्मण था, और विश्व के ब्राह्मण उसकी प्रसंशा करने मैं कोइ कमी नहीं करते थे, तथा धर्म के ठेकेदार या धर्मगुरु ब्राह्मणों से ही आते हैं, इसलिए कोइ उससे भिड़ता नहीं था|
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रावण एक कुशल चतुर राजनीतिज्ञ अवश्य था, वीर कदापि नहीं

रावण के बारे मैं अनेक कथाएँ हैं, जो उसे देवताओं पर विजय पाने वाला अत्यंत शक्तिशाली और पराक्रमी व्यक्ति बताते हैं, जिसके बारे मैं कहावत है कि कैलाश पर्वत उठा लिया, तथा ईश्वर शिव उसपर विशेष प्रसन्न थे| पूरा इतिहास बिना अलोकिक और चमत्कारिक शक्ती के जब आप समझेंगे तो आपको पता पड़ेगा इन सब झूट के पीछे कारण क्या है | सत्य तो यह है कि रावण एक सामान्य पर कुशल राजनीतिज्ञ था, जिसने अपना आस्तित्व कुटनीती से बढ़ाया, न की शक्ती से, और ब्राह्मण समुदाय पर उसने अपनी कुटनीती के कारण विशेष पकड़ बनाए रक्खी|
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सीता अपहरण के पीछे रावण की कूटनीति

जब सूर्पनखा के नाक कान काट दिए गए, तो वीर भाईयों की तरह खर दूषण राम से युद्ध करने गए, और वीरगती को प्राप्त हुए| लकिन सगे भाई रावण ने ऐसा नहीं करा; वोह राजनीति का पंडित था, उसने एक कूटनीति की चाल चली | उसको दस सिर वाला, या दशानन ऐसे ही नहीं कहा जाता था, वोह बुद्धी के बल पर ही इतना उपर आया था, ना की वीरता के कारण |
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राम का वनवास, राजसी सन्देश है कि समाज कुटुंब से उपर है

एक बार फिर से भौतिक और इतिहास के परिपेक्ष मैं रामायण के विभिन्न वृतान्त को श्री राम के वनवास तक समझ लें|

उस समय भारत मैं तीन प्रमुख राज्य थे; जनकपुरी, जो की हिमालय, और हिमालय की तराई के छेत्रो का बड़ा राज्य था, वाराणसी, जो की गंगा छेत्र जो समुन्द्र तक जाता है, और अयोध्या, जो की नीचे कन्याकुमारी तक विस्तृत था| चुकी नए महायुग मैं सतयुग के चारो भाग समाप्त हो चुके थे, त्रेता युग के तीन मैं से एक भाग समाप्त हो चूका था, और दूसरा चल रहा था, इसलिए मानव विज्ञानिक विकास काफी कुछ कर चूका था |
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रामायण कालके विज्ञान की विदेशो से बात सुनकर सर शर्मसे क्यूँ नहीं झुकता

जबभी कोइ विदेशी शोघकरता, बहुत प्राचीन विज्ञान के उपर लेख प्रस्तुत करते हैं, और उसमें सबूत के समर्थन मैं रामायण का उल्लेख होता है तो हम सबको बहुत खुशी होती है, गर्वित होते हैं | यह गलत है, हमारा सर तो शर्म से झुक जाना चाहीये, क्यूँकी हमने तो वोह कुछ करा नहीं जिससे हिन्दू युवा छात्र विश्व के प्राचीन इतिहास पर शोघ कर सके, उल्टा उसको रोकने का पूरा प्रयास कर रहे है |
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कोडित पुराण रामायण और महाभारत को कैसे समझा जाय

यहाँ एक भौतिक तथ्य से आपको अवगत कराया जा रहा है, जिससे आपको भी मानना पड़ेगा की सनातन धर्म स्वंम इश्वर ने मानव और श्रृष्टि कल्याण के लिए प्रस्तुत करा है; बस उसका दुरूपयोग नहीं होना चाहीए |
क्या आपको मालूम है की समस्त पुराण स्तोत्र मैं लिखे हैं, जिसका अर्थ होता है
“कोडित भाषा” ?
क्या आपको इस बारे मैं आपके धर्म गुरु ने बताया है ?
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सिता त्याग तथा साक्ष्य विधि जो सहपलायन मैं आजभी प्रगतिशील देशोंमै मान्य  

ऐसी मान्यता है कि जब राम अयोध्या वापस लोट आये तो श्री राम के राजभिषेक के लीये वहाँ के ब्राह्मण समुदाय ने इनकार कर दिया ! कारण यह था कि रावण एक प्रतिष्टित ब्राह्मण थे तथा सीता को भिक्षा में स्वेच्छा से लाए थे| अत: राम के पास कोइ अधिकार नहीं था कि वोह रावण तथा उसके ब्राह्मण परिवार का निर्ममता से संघार करके सीता को वापस लाए|
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श्रीराम मनुष्य रूपमैं ईश्वर अवतार थे जिन्होंने उद्धारण से धर्म स्थापित करा

रामायण भारत मैं सब ने पढी है, और टीवी पर उसका सीरियल भी देखा है, इसलिए लोकप्रियता मैं कोइ कमी नहीं है; और हिन्दू समाज धर्म पर अटूट विश्वास रखता है, फिर श्री राम के आदर्शो से समाज पूरी तरह से अछूता क्यूँ हैं?
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ढोल गवाँर सूद्र पसु नारी, सकल ताड़ना के अधिकारी- एक विश्लेषण

यह पंक्ती उस समय के धार्मिक और शक्तिशाली लोगो की सोच के अनुकूल थी, ताकी कुछ लोग तो मानस का विरोध ना करें, और इस प्रकार हर उस व्यक्ती को काम करना पड़ता है, जो समाज मैं बदलाव लाने का प्रयास कर रहा है
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स्वर्गनर्कदेवताराक्षस पर विचार और परिभाषा  

जिस तरह से असुर-राज पताल मैं हैं उसी तरह से देवता तताकथित स्वर्ग मैं रहते हैं जो पृथ्वी लोक से बाहर है| यह विज्ञान की दृष्टि से भी आवश्यक जानकारी है, कि पृथ्वी मैं जो भी जीवन, या श्रृष्टि है, उसके लिए पृथ्वी का सौय्रमंडल और ब्रह्माण्ड से सामंजस्य मुख्य कारण है, चुकी पृथ्वी अपने आप मैं असमर्थ है; असुरो का निवास है|
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क्या हनुमान छलांग लगा कर लंका पहुचे थे, या समुन्द्र मार्ग से

१४ वर्ष के वनवास मैं राम ने लंका से युद्ध के बारे मैं कूटनीतिज्ञ और राजनेतिक परिपेक्ष मैं काम करा थाकुछ लंका के प्रमुख व्यक्ती राम के संपर्क मैं थेइसी कारण हनुमान पहले विभीषण से मिलें
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क्या प्राचीन युगों मैं अस्त्र-शस्त्र सिद्ध मन्त्र से संचालित होते थे ?

रावण ने माया रची', प्राचीन युगों मैं अस्त्र-शास्त्र का सिद्ध मन्त्र से संचालनअन्य लंबी दूरीके ध्वनिक यंत्रअब आम बात हैऔर अज्ञान के कारण धर्मगुरु इसे समाज को समझा नहीं पारहे हैं
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त्रेतायुग के खगोलीय सूचना के अभाव मैं श्री राम की जनम कुंडली नहीं बन सकती

श्री रामचंद्र जी का जन्म चैत्र मास मैं शुक्ल पक्ष की नौमी तिथी को ठीक दुपहर को हुआ था| महारिषि वाल्मिकी ने जन्म के समय के खगोलिक पैमानों का विवरण दिया है, जिसको स्वीकार करके ही आगे बढ़ सकते हैं|
महाऋषि वाल्मिकी के अनुसार, श्री राम के जन्म के समय के पैमानों का विवरण इस प्रकार है:
1)       सूर्य उच्च का था, और समय ठीक दुपहरका था;
2)       चन्द्रमा पुनर्वसु नक्षत्र मैं था, और तिथी शुक्ल पक्ष नौमी थी,
3)       लग्न और चंद्र कर्क मैं थे| 
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वानर सेना के साथ श्री राम का लंका से युद्ध निर्णय उचित था पर भय-रहित नहीं

उस समय विज्ञान का विकास आज के युग से ज्यादा थाऐसे मैं समझने वाली बात है की रावण की सेना आधुनिक अस्त्र-शास्त्र का प्रयोग कर रही थीतो वोह पत्थर फेकने वाली वानर सेना या बंदरों की सेना से नहीं हारी |
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राम से पूर्वधर्म का दुरूपयोग महिलाओआदिवासी समाज के शोषण के लिए

परशुराम उन क्षत्रियों को छोड दे रहे थे, जो उनके साथ रहने वाली महिलाओं से विवाह करने के लिए तैयार थे, और वानरों से पशु जैसा व्यवाहर न करने के लिए वचन दे रहे थे

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कुछ अज्ञात लघु तथ्य माता सीता से सम्बंधित
अग्नि परीक्षा और सीता का त्याग, सम्बंधित घटना हैं| श्री राम ने माता सीता का त्याग, राजा बनने के उपरान्त, अग्नि परीक्षा के परिणाम को अस्वीकार करके किया
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हिंदू समाज जब सशक्त होगा जब भारत का नेतृत्व एक हिंदू कर रहा होगा


नेतृत्व के लिए संकल्प और प्रतिबधता अति आवश्यक हैजो की अब तक दिखाई नहीं दिया है |
आप मैं से काफी लोगो ने इस ब्लॉग की पोस्ट पढ़ी होंगीजो की बर्तमान सोच को चुनौती दे रही हैंलकिन किसी ने उसे समझने का प्रयास नहीं करा जबकी वह एक PROFESSIONAL प्रयास है कर्महीन हिंदू समाज को कर्मठ बनाने के लिएऔर रिजल्ट भी GUARANTEED है |
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धर्म जो अग्नि परीक्षा को अधर्म घोषित करने पर मिलें


सनातम धर्म मैं अनेक समस्या हैं और सबसे बड़ी समस्या यह है की यदि समाज विरोधी कहीं धर्म सिखाया जा रहा है या बताया जा रहा है तो किसी के पास कोइ विकल्प नहीं है उसे सही करने का कुछ ऐसा ही हो रहा है प्राचीन इतिहास के साथ जिसमें रामायण का उद्धारण यहाँ दिया जा रहा है |
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धर्मगुरु समाज को राक्षस और असुर कि भिन्नता की सूचना तो दें


इक्कीसवी सदी सूचना युग कहलाती है , और सूचने के अनेक सोत्र उपलब्ध हैं |
यह पोस्ट इसलिए जरूरी हो गयी कि बहुत से लोग यह प्रश्न पूछ रहे हैं कि यदि यह सत्य है तो यह सूचना हमें गुरुजनों से क्यूँ नहीं मिली |
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धर्मगुरु समाज को यह तो बताओ कि राक्षस और असुर अलग हैं


आज का युग सूचना युग है इन्टरनेट और कंप्यूटर के कारण सूचना हर विषय मैं सुलभता से उप्लभ्द है आज धर्म गुरुजनों का यह प्रथम कर्तव्य है कि समाज को अधिक से अधिक सूचना उप्लभ्द कराएं खेद की ऐसा हो नहीं रहा है और यह भी प्रमुख कारण है हिंदू समाज के कर्महीन होने के |
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क्या तुलसीदास कर्त रामचरितमानस महारिषि वाल्मीकि की रामायण का विरोध करती है...कदापि नहीं

हिंदू धर्म सर्वथा कर्मप्रधान धर्म रहा है ! कर्मवीर श्री कृष्ण का कर्मछेत्र  कहलाता है जहाँ धर्म की परिभाषा कर्म की व्याख्या से शुरू होती है ! परन्तु समस्या इतनी जटिल थी की कर्मवीर हिंदू समाज बच नहीं सकता था ! 
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अवतार इश्वर से अधिक महत्वपूर्ण है हिन्दुओं के लिए


हिन्दू सृजन(CREATIONमैं नहीं क्रमागत उन्नति(EVOLUTION मैं विशवास करते हैं ! इसीलिये अवतार अत्यंत महत्वपूर्ण हैंहिन्दू धर्म मैं ! कितने हिन्दू श्री विष्णु की विधिवत पूजाअर्चना करते हैं,? नहींवे श्री विष्णु  अवतार श्री राम और कर्मवीर श्री कृष्ण की पूजा अर्चना से ही श्री विष्णु को प्रसन्न करते हैं !
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त्रेता युग के वैज्ञानिक विकास का मूल्यांकन आज के विकास 
के संदर्भ मैं

गंभीर समस्या यह है कि यदि वर्तमान हिंदू समाज के लाभ के बारे मैं सोचना है तो रामायण को इतिहास समझना पड़ेगाऔर समस्त चरित्रों का वर्णण बिना अलोकिक और चमत्कारिक शक्तियां के करना होगातभी उस समय के विज्ञान का लाभ समाज को मिलेगा लकिन इसके लिए हमारे धर्म गुरु तैयार नहीं हैं |
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अवतार की परिभाषा 
http://awara32.blogspot.com/2012/06/blog-post_11.html 

“अवतार , या तो दर्शाते हैं , या उपलब्ध कराते हैं,  ऐसी परिस्थिती जिसमें मानव के जीवित रहने मैं उल्लेखनीय सुधार हो | मनुष्य रूप मैं अवतार अवतरित हो कर आवश्यक सुधार मानवता की प्रगति के लिए लाते हैं , जब , जब की मानवता अत्यंत संकट मैं हो | और भौतिक प्रयास समाज की प्रगति के लिए जो करा जाता है , वह धर्म है”
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हनुमान बंदर नहीं वन मैं उत्पन्न मनुष्य की नई प्रजाति से थे 
http://awara32.blogspot.com/2012/05/blog-post_28.html

वानर, जैसा कि शब्द से स्पष्ट है , वह वन + नर से बना है , जिसका अर्थ है; “वन मैं उत्पन्न हुआ मनुष्य” | वानर मनुष्य की नई प्रजाति थी जो कि स्वाभाविक रूप से श्रृष्टि के विस्तार मैं वन मैं उत्पन्न होई , उनके पूछ थी , और मनुष्यों की तरह से ही उन्होंने छोटे छोटे कसबे वन मैं बना रखे थे | वे बंदर कदापि नहीं थे |
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त्रेता युग के इतिहास रामायण पर से मिथ्या की चादर हटाएँ 
http://awara32.blogspot.com/2012/05/blog-post_21.html

कुछ लोगो का विरोध है, तथा कुछ लोग का मत है कि संभवत: धार्मिक इतिहास साधारण इतिहास से हट कर है , तथा उसमें चमत्कारिक और आलोकिक शक्ति हो सकती हैं , तथा कुछ लोग कह रहे हैं कि त्रेता युग मैं लोगो के पास ऐसी शक्तियां थी |
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वनवास के दौरान राम ने वानरों को नागरिक और सैन्य प्रशिक्षण दिया 
http://awara32.blogspot.in/2012/05/blog-post_18.html 

आज़ाद भारत, जो श्री राम को तरह तरह से पूजता है , वह यह कैसे स्वीकार करलेता है कि समस्त क्लेश का नाश करने वाले श्री राम के स्वंम के निवास पर कोइ विघ्न बाधा , वह भी माता सरस्वती , हेरफेर कर के उत्पन्न कर सकती थी ?
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रामायण इतिहास है या धार्मिक ग्रन्थ 
http://awara32.blogspot.in/2012/05/blog-post.html


इस प्रश्न का उत्तर, चर्चा मैं लोग अपनी सुविधा अनुसार दे देते हैं |
परन्तु जब हिंदू समाज कर्महीनता की हद छु रहा है, तब आवश्यक हो जाता है कि हर प्रश्न का सही उत्तर समाज के पास हो |
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मर्यादा हीन पुरुष और मर्यादापुरुषोत्तम राम मैं अंतर
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अनेक प्रश्न इस विषय को लेकर सामने आ रहे हैं ; सबसे ज्यादा प्रश्न इस कथन के साथ कि वनवास मैं राम के पास अयोध्या से सेना बुलाने का कोइ विकल्प नहीं था |
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एक पुरुष एक विबाह..को राम धर्म क्यूँ नहीं बना पाए  ?
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श्री राम भगवान विष्णु के अवतार थे जो कि अत्यंत कठिन समय मैं , समाज को उचित दिशा , अपने स्वंम के उद्धारण से दर्शाने आए थे ! समझने कि बात यह है कि अवतार समाज मैं सुधार किस प्रकार लाते हैं ?......क्या हर प्रयास उनका सफल हो जाता है ? अगर ऐसा होता तो त्रेता यग मैं एक के बाद एक अवतार क्यूँ आए ? परशुराम अवतार के तत्पश्यात राम अवतार , क्यूँ ? 
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क्या रामायण मैं वर्णित नागपाश अस्त्र, एक रसायन शस्त्र था ?
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WAS NAGPAASH A CHEMICAL WEAPON?
रामायण त्रेता युग का इतिहास है, और यह हिंदू समाज जितनी जल्दी समझ ले उतना ही देश के लिए और हिंदू समाज के लिए लाभकारी है ! आम हिंदू बड़े गर्व से यह तो कहता है की रामायण के काल मैं विमान थे, लकिन जब उससे इस सत्य के अनुसार इतिहास को समझने को कहा जाता है, तो वोह संस्कार या अपने गुरु का हवाला दे कर अलग हो जाता है ! 
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इश्वर परुशुराम अवतार तत्पश्चात् राम के रूप मैं क्यूँ अवतरित हुए 
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आजादी के बाद हिंदू समाज कि प्रगति नहीं हो पा रही ! और तो और, समाज की कर्महीनता के कारण अपने ही देश मैं हिंदू समाज की उचित मांगो को अनदेखा कर दिया जा रहा है ! अपने ही देश मैं हिंदू समाज धीरे धीरे असुरक्षा कि और जा रहा है !
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शिव धनुष को विघटित करके राम ने क्या धर्म स्थापित करा
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हिंदू धर्म रामायण को इतिहास मानता है, और उसके पीछे कारण यह है कि यदि वेद को समझने मैं कोइ त्रुटि हो रही हो, तो रामायण और महाभारत को दूसरा वेद मान कर , मनुष्य रूप मैं अवतार ने,  जो आदर्श और उद्धारण प्रस्तुत करें हैं , उसे धर्म मान कर आगे बढ़ा जाय ! 

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सीता अपहरण पश्यात राम ने युद्ध हेतु अयोध्या से सेना क्यूँ नहीं बुलाई ?
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यह प्रश्न अत्यंत स्वाभाविक है , यदि हम रामायण को इतिहास और श्री राम और माता सीता को  इश्वर अवतार मानते है ! कंही कंही  यह बात भी कही जाती रही है कि, वनवास मैं राम अयोध्या से सेना कैसे बुला सकते थे ! यह बिलकुल गलत बात है जो कि उन लोगो ने फैला रखी है जो हिंदू समाज का भला नहीं चाहते !
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गोस्वामी तुलसीदास कर्त रामचरितमानस...उस समय कि सामाजिक पृष्ठभूमि में समीक्षा
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गोस्वामी तुलसीदास  सोल्वी शताब्दी(१५३२-१६२३) के महाकवि थे, जिन्होंने हिंदी कि अवधि भाषा में रामचरितमानस कि रचना करी ! उनका योगदान हिंदू धर्म कि रक्षा के लीये सरहानीय है ! कुछ लोगो का मत है की वोह हनुमान जी के अवतार थे, तो कुछ कहते हैं की हनुमान जी की उनपर असीम कृपा थी; तो कुछ उन्हें महारिषि वाल्मीकि का अवतार मानते हैं ! 
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हमारी मान्सिकता रामायण को इतिहास नहीं मानने देती
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|| ध्यान रहे कि रामायण यदि इतिहास है तो उसमें किसी भी चरित्र के पास अलोकिक और चमत्कारिक शक्ति नहीं हो सकती ||
क्या कारण है कि हमसब के परस्पर प्रयास के फल स्वरुप लोगो ने यह तो स्वीकार कर लिया कि वानर बन्दर नहीं, वन में नई मनुष्य प्रजाति कि उत्पत्ति थी ..........
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परशुराम का अवतार वानर प्रजाति और स्त्रियों की रक्षा के लीये
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यह प्रश्न बार बार उठता है कि श्री विष्णु ने परशुराम के रूप में अवतार क्यूँ लिया, तथा उन्होंने इक्कीस बार पृथ्वी को क्षत्रिय विहीन क्यूँ करा ?
इससे पहले की इसपर विस्तार से चर्चा हो, यह जानना आवश्यक है कि त्रेता युग में, उस समय की भूगोलिक व् सामाजिक स्थिती क्या थी ?
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रामायण में व्याख्या और अंतर्वेषण(INTERPRETATION and INTERPOLATION)
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रामायण एक महाग्रन्थ है, तथा त्रेता युग का इतिहास ! चुकि इतिहास का संबंध उस युग के महान नायकों से होता है, इसलिए रामायण के किसी भी चरित्र के पास चमत्कारिक व् अलोकिक शक्ति नहीं थी ! यह समझे बिना न तो हम रामायण को समझ सकते हैं , न ही श्री विष्णु अवतार राम ने जो आदर्श स्थापित करे हैं उनका लाभ ले सकते हैं !
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वन जाने में कैकई ने राम की सहायता क्यूँ करी
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अब जब कि सब राजकुमार विवाहित हो गये तो महाराज दसरथ अपने अंतिम उत्तरदायित्व से भी मुक्त होना चाहते थे, और वह था युवराज की विधिवद घोषणा और तिलक ! परिवार में इसको लेकर कोइ विरोध भी नहीं था, कि ज्येष्ट पुत्र श्री राम ही इसके उत्तराधिकारी हैं !
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राम राज्य ..सामाजिक न्याय और धर्म का राज्य
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इससे पहले कि आगे बढ़ें सनातन धर्म का अर्थ समझ लेते हैं ! सनातन धर्म का गैर किताबी अर्थ है , सम्पूर्ण हिंदू समाज का विकास जिसमें सबके पास बराबर के विकास के अवसर हों !            
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त्रेता युग की मर्यादाएँ और मर्यादा पुरुषोत्तम राम
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“यह बात विशेष ध्यान देने की है कि धर्म को झुकना पड़ता है, जब वोह प्रतिष्टित और शातिशाली लोगो से टकराता है ! और इसीलिये भगवान को बार बार अवतार लेना पड़ता है ! स्वंम श्री राम एकाधिक विवाह को धर्म मानते हुए और उद्धारण स्थापित करने के बाद भी, ऐसा कोइ प्रबंध नहीं कर पाए कि भविष्य में इसपर सख्ती से अमल हो सके”
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अवतार व भगवान और हिंदू समाज की प्रगति
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ईशवर की मनुष्य रूप में या अन्य प्राणी के रूप में उत्पत्ति को अवतार कहा जाता है ! उद्देश श्रृष्टि को उस समय के घोर संकट से निकालने का होता है ! लेकिन अवतार को लेकर विवाद भी हैं, कुछ हिंदू अवतार को मानते हैं, कुछ नहीं ! 
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राम सुग्रीव मैत्री संधि ...एक विश्लेशण
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सीता अपहरण के पश्चात , तथा यह जानकारी मिलने के बाद कि सीता का अपहरण रावण ने करा है, राम को अब यह निर्णय लेना था कि रावण से युद्ध कैसे करा जाय ! वोह अयोध्या से सेना बुलवा सकते थे ! ध्यान रहे वनवास कि ऐसी कोइ शर्त नहीं थी कि अयोध्या के राजघराने कि बहु, या महारानी सीता के प्रति अयोध्या का कोइ उत्तरदायित्व नहीं था, न यह बात तर्कसंगत है !
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रामायण ..त्रेत्र युग का इतिहास
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श्री राम और माता सीता के अनेक चरित्रों का वर्णन रामायण है ! जब सूचना का आभाव था तो लोग इसे कथा मानते थे, तथा इसके इतिहास होने पर प्रश्न चिन्ह था, लेकिन आज नहीं ! आज अधिकांश हिंदू रामायण को त्रेता युग का इतिहास और श्री राम और माता सीता को श्री विष्णु और देवी लक्ष्मी का अवतार मानते हैं ! 
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राम से पूर्व... धर्म का उपयोग स्त्री जाती के शोषण के लिये
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महाऋषि गौतम कि पुत्री अंजनी, बिना विवाह के गर्भवती हो गयी, तब उन्हे वन में भेज दिया गया, जहाँ हनुमान का जन्म होआ !
माता अहलिया को उन्ही के पति गौतम ऋषि ने उनके कथित अभद्र व्यवहार, के कारण मार डाला !
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क्या रावण को मारने के लिये भगवान अवतरित होए
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भगवन विष्णु पृथ्वी पर जब जब धर्म की विशिष्ट हानि होती है, तब अवतरित होते हैं ! धर्म की हानि अनेक कारणों से हो सकती है, जिसमे प्रमुख कारण, जो कि हर युग के लिये मान्य हैं, वो इस प्रकार हैं :
1. स्त्री पर विशेष अत्याचार जिसमें धार्मिक गुरुजन भी शामिल हों !
2. कमजोर वर्ग पर विशेष अत्याचार जिसमें धार्मिक गुरुजन भी शामिल हों या चुप्पी सान्ध कर बैठे हों !
3. जब शासकों व् धार्मिक गुरुजनों का व्यवहार श्रृष्टि विरोधी हो जाय !
उपरोक्त तीनो कारण आवश्यक हैं भगवान विष्णु को मनुष्य रूप में अवतार लेने के लिये !
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सीता का त्याग राम ने क्यूँ करा... सही तथ्य
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यहाँ यह जानना आवश्यक है कि अग्नि परीक्षा उस समय कि एक उचत्तम मर्यादा थी जिसको धार्मिक मान्यता भी प्राप्त थी ! विजई सेना के प्रमुख की हैसियत से श्री राम का उस समय की मर्यादा का पालन सर्वथा उचित्त भी था !
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त्रेता युग के विमान, विज्ञानिक प्रगती और रामायण
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उसका एक उद्धारण तो हम सब को मालुम है; शिव धनुष जो की प्रलय स्वरूप, विनाशकारी था(WEAPON OF MASS DESTRUCTION), और जिसको बनाने के लिये विकसित विज्ञान की आवश्यकता थी, वोह श्री राम से पूर्व त्रेता युग मैं था !
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त्रेता युग विज्ञान और विमान का युग था
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त्रेता युग विज्ञान और विमान का युग था ! और यह बात भारत का प्राचीन इतिहास बताता है; रामायण जो की त्रेता युग का इतिहास है वोह बताता है ! लेकिन क्या हम उसका लाभ ले पा रहे हैं? क्या हमारे धार्मिक गुरुओं ने युवा हिंदू छात्रों को शोघ  के लिये प्ररित करा ? और अगर नहीं करा तो क्यूँ नहीं करा? 
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धार्मिक आद्यात्मिक साधू तथा गुरु की परिभाषा
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हिंदू धर्म मैं यह परेशानी इस लिये भी है की धर्म शब्द के दो अलग अर्थ और प्रयोग हैं | एक तो सनातन धर्म या HINDU RELIGION जो की इस बात की जानकारी देता है की सनातन धर्म क्या है और कौन उसमें आतें हैं ! दूसरा धर्म का अर्थ है भौतिक तरीके से अपनी समाज मैं जिम्मेदारियों को निभाना ! यही दूसरा धर्म स्वर्ग की सीडी है !
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श्री राम की अनावश्यक आलोचना समाप्त करने मैं सहायता करें
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जबभी किसी स्त्री पर कहीं भी अत्याचार होता है, समाज के कुछ लोग यह कह कर उसकी आलोचना करते हैं कि भगवान श्री राम ने भी सीता कि अग्नि परीक्षा ली थी और इसके बाद भी माता सीता का त्याग कर दिया |
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ABOUT ME:

A Consulting Engineer, operating from Mumbai, involved in financial and project consultancy; also involved in revival of sick establishments.

ABOUT MY BLOG: One has to accept that Hindus, though, highly religious, are not getting desired result as a society. Female feticide, lack of education for girls, dowry deaths, suicides among farmers, increase in court cases among relatives, corruption, mistrust and discontent, are all physical parameters to measure the effectiveness or success/failure of RELIGION, in a society. And all this, despite the fact, that spending on religion, by Hindus, has increased drastically after the advent of multiple TV channels. There is serious problem of attitude of every individual which need to be corrected. Revival of Hindu religion, perhaps, is the only way forward.

I am writing how problems, faced by Indian people can be sorted out by revival of Hindu Religion.