JUST REMEMBER RAMAYAN IS HISTORY OF HUMANS

I need your view on this: “My RAM was neither a criminal nor a hypocrite who would bless the abduction of Sita by requesting Agni Dev for safe keeping, and then ask for Agni Pariksha. As if this was not enough, he would then disown Sita to APPEASE his public and satisfy his hunger for power. No he did no such things.”

The correct interpretation: Shri Ram and Mata Sita established AGNI PARIKSHA AS AN ADHARM.

The correct interpretation of facts in Ramayan is arrived at by accepting that Ramayan, being History of HUMANS, NO SUPERNATURAL or MIRACULOUS powers was available to any of the characters.

Monday, October 31, 2011

धार्मिक आद्यात्मिक साधू तथा गुरु की परिभाषा


यह पोस्ट आपको धार्मिक, आद्यात्मिक, साधू तथा गुरु का अर्थ, तथा उनमें क्या अंतर है उसपर प्रकाश डालेगी!

DEFINITION OF DHARMIC, SPIRITUAL, SAADHU, GURU

हिंदी मैं ब्लॉग पोस्ट लिखने का यह लाभ अवश्य मिल रहा है कि ज्यादा से ज्यादा लोग अब ब्लॉग से जुड रहें हैं !

सिर्फ चार पोस्ट लिखने के बाद पत्रों के संख्या बढ गयी! ज्यादातर लोग फिलहाल चार पोस्ट के संधर्भ मैं ही प्रश्न कर रहे हैं ! अधिकाँश लोग की इस बात मैं जिज्ञासा है, या यूँ भी कह सकते हैं कि उनको पूरी तरह से कथित बात पर विश्वास नहीं है कि पूजा और विधी धर्म का पालन करने के लिये पर्याप्त नहीं है ! इस बात से भी तकलीफ है कि गुरु के आश्रम पर जा कर जो सेवा की जाती है वो स्वर्ग पहुचाने के लिये काफी नहीं हैं! परंतु यही सत्य है!

स्वर्ग का द्वार धर्म करने से ही खुलता है ! यहाँ तक यह बात बिलकुल सच है ! लेकिन जो बात यहाँ पर कही जा रही है, व जो बात अब तक आपको समझाई गयी है उसमें इतना विरोध क्यूँ हैं ? क्या पूजा, विधी (हवन, मंदिर मैं जा कर नारियल फोडना, धुप बत्ती करना, आदी,,), धर्म नहीं है? तथा क्या अब तक की जो मान्यता है कि गुरु के आश्रम मैं जा कर सेवा करना धर्म नहीं है? इन सब प्रश्नों का उत्तर आपको यहाँ मिलेगा!

हरेक धर्म/RELIGION के ३ प्रमुख भाग होते हैं:

१. पूजा या भक्ति;
२. विधी, जैसे कि अगरबत्ती जलाना, फूल अर्पण करना, हवनं ...;
३. धर्म, या आपकी धर्मानुसार जिम्मेदारियां या कर्म जिसे की PHYSICALLY करना है

eg:
• हरे पेड को काटना पाप है,
• अपने परिवार, तथा समाज मैं रह रहें है, उसकी तरक्की के लीये प्रयास करें;
• शादी पर जब हमसब दावत का आनंद लेतें हैं तो वह एक संकल्प है कि नवदंपती की समाज हर संभव मदद करेगा;

पूजा, विधी, गुरु के आश्रम मैं जा कर सेवा करना धर्म करने के लिये प्रेरित करता है! वोह अपने आपमैं धर्म नहीं है! गुरु के आश्रम मैं सेवा वास्तव मैं एक विधि ही है!

इसके बारे मैं विस्तार से जानकारी के लिये आप पढें :
आवश्यकता है हिंदुओं की मानसिकता बदलने की, ताकी वो बदलाव और सुधार ला सकें
हिंदुओं का भौतिक धर्म गुलामी के समय कैसे घटाया गया

हिंदू धर्म मैं यह परेशानी इस लिये भी है की धर्म शब्द के दो अलग अर्थ और प्रयोग हैं | एक तो सनातन धर्म या HINDU RELIGION जो की इस बात की जानकारी देता है की सनातन धर्म क्या है और कौन उसमें आतें हैं ! दूसरा धर्म का अर्थ है भौतिक तरीके से अपनी समाज मैं जिम्मेदारियों को निभाना ! यही दूसरा धर्म स्वर्ग की सीडी है !

अब आप सरल भाषा मैं पूर्ण परिभाषा समझीये :

धार्मिक व्यक्ति: वह व्यक्ति जो की अपनी उन्नति के लिये, अपने परिवार, तथा अपने पूरे परिवार, तथा जिस समाज, मोहल्लें, या सोसाइटी मैं वो रह रहा है, उसकी उनत्ति के लिये पूरी निष्ठा व् इमानदारी से कार्यरत रहता है वो धार्मिक व्यक्ति है! ऐसा करते हुए वो समाज मैं प्रगती भी कर सकता है व् घन अर्जित भी कर सकता है !

यहाँ यह स्पष्टीकरण आवश्यक है कि निष्ठा व् इमानदारी से कार्यरत रहने का यह भी आवश्यक मापदंड है कि वह व्यक्ति समस्त नकरात्मक सामाजिक बिंदुओं का भौतिक स्थर पर विरोध करेगा , जैसे कि भ्रष्टाचार, कमजोर वर्ग तथा स्त्रीयों पर अत्याचार, पर्यावाह्रण को दूषित करना या नष्ट करना, आदी, ! ऐसा व्यक्ति सत्यम शिवम सुन्दरम जैसी पवित्र शब्दावली मैं सत्यम है!

आद्यात्मिक व्यक्ति: धार्मिक व्यक्ति व् आद्यात्मिक व्यक्ति मैं अंतर केवल इतना ही है कि जहां धार्मिक व्यक्ति अपने धार्मिक प्रयास से धन अर्जित करता है, आद्यात्मिक व्यक्ति समाज को देनें मैं ज्यादा विष्वास रखता है न कि लेनें मैं! भौतिक संसार मैं यदी कोइ व्यक्ति देनें मैं ज्यादा विष्वास रखता हो न कि लेनें मैं, तो ऐसे व्यक्ति के लिये धन अर्जित करना कठिन हो जाता है! आद्यात्मिक व्यक्ति सत्यम शिवम सुन्दरम जैसी पवित्र शब्दावली मैं शिवम है!

साधू या संत:यहाँ त्याग पूर्ण है ! ऐसे व्यक्ति ने जीवन के समस्त भौतिक सुख त्याग दिये हैं! उसके जीवन का एक ही लक्ष्य है; वोह की संसार को और अधिक सुन्दर बनाना ; ऐसा व्यक्ति हर जीवन को सुखी बनाना चाहता है ! वोह सत्यम शिवम सुन्दरम जैसी पवित्र शब्दावली मैं सुन्दरम है!

गुरु: प्राचीन काल मैं गुरु, पूर्ण शिक्षा देने के पश्यात शिष्य से गुरु दक्षिणा स्वीकार करता था! तथा इससे पूर्व वो समाज के सामने भौतिक मापदंडो से शिष्य का परिक्षण भी लेता था! अफ़सोस कि आज धर्म की पिछले ६४ वर्षों की उप्लभ्धीयओं के बारे मैं यदी भौतिक मापदंड से बात करें तो धर्म नकरात्मक या विपरीत दिशा मैं जाता हूआ पाएंगें ! अन्य पोस्टों मैं इसकी विस्तृत जानकारी दी गयी है ! पढें: हिंदू आजादी के बाद भी घुट घुट कर जी रहा है

आजादी के बाद धार्मिक गुरुओं ने धर्म सिखाया या समाज को गुमराह करके स्वयं के लिये धन और शक्ति अर्जित करी, इसका आंकलन आप स्वंम करें!

You can also read:
MEANING OF WORDS: SANATAN DHARM, DHARMIC, SPIRITUAL, GURU, SAADHU
MEANING OF SATYAM SHIVAM SUNDARAM

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