Tuesday, April 18, 2017

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मेरी हाल की तीन पोस्ट्स ~~MY RECENT THREE POSTS
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अभी हाल में राज्य सभा में माता सीता के जन्म स्थान और उनके वास्तविक अस्तित्व को लेकर कुछ लोगो ने प्रश्न उठाए, जिसका हिन्दू समाज की और से सरकार ने उत्तर दिया कि श्री राम और माता सीता वास्तव में अवतरित हुए थे, और यह आस्था का प्रश्न नहीं है, इतिहास है ! उसी तरह से श्री कृष्ण पर भी प्रश्न उठते रहे हैं, लकिन हिन्दू समाज उनको भी ऐतिहासिक पुरुष और ईश्वर अवतार मानता है | उपरोक्त कथन में कही कोइ संदेह है भी नहीं, होना भी नहीं चाहीये |

यहाँ तक तो सत्य है कि आस्था इसमें मात्र चर्चा के लिए इतनी मानी जा सकती है कि श्री राम और श्री कृष्ण या माता सीता , जो वास्तव में इतिहास का अंग हैं, वे अवतरित ईश्वर भी थे, लकिन यह एक अलग विषय है | अलग विषय इसलिए है कि जानबूझ कर संस्कृत विद्वानों और धर्मगुरुओ ने इन अवतारों को कभी भी इतिहास मान कर समाज के सामने प्रस्तुत नहीं करा |

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कथा और इतिहास में वास्तविक अंतर, इसको समाज सुधार हेतु समझना अपनाना है

मुझे तुलसीदास जी द्वारा रचित ‘मानस’ में पूर्ण आस्था है, और मेरे घर पर सब शुभकार्यो का आरम्भ मानस के पाठ से ही होता है | छोटा शुभ कार्य हो तो, सुंदरकाण्ड का पाठ करके शुभ आरम्भ कर दिया, बड़े में, पूरे मानस का पाठ !

मानस एक कथा है, और राम का त्रेतायुग के काल का आकलन इतिहास से हो सकता है | उसी तरह से पुराण और महाभारत को भी, कथा के रूप में ही अब तक लोगो ने समझा है | सिर्फ और सिर्फ भावनात्मक बोध है कि रामायण, महाभारत और समस्त पुराण इतिहास हैं, और चुकी समस्त ग्रन्थ संस्कृत में हैं, तो इसको इतिहास के रूप में प्रस्तुति करने का कार्य संस्कृत विद्वानों का था, जो नहीं हुआ | 

विद्वानों और धर्मगुरूओ ने निजी स्वार्थ कारण इसको MYTHOLOGY(यानि की मिथ्या) की संज्ञा से सुसज्जित होना स्वीकार करा, लकिन प्राचीन इतिहास के स्वरुप में प्रस्तुति नहीं करी; उसको कथा के रूप में समाज के शोषण के लिए प्रस्तुत करा गया !

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सत्य को मत दबाओ...सनातन में गुरु नहीं, भौतिक मानक और मापदंड आदर्श हैं

मालूम नहीं क्यूँ संस्कृत विद्वान और धर्मगुरु वोह सब भी समाज को गलत बता पा रहे हैं, जिसपर की एक शिक्षित समाज को सवाल पूछने चाहीये | लकिन समाज की मानसिकता तो पूरी तरह से ‘गुलामी’ की होगयी है, इसलिए समाज शिक्षित होने पर भी गलत बाते भी स्वीकार कर लेता है , जिसका परिणाम भौतिक स्तर पर आप भारत के अंदर देख सकते हैं | 

बहुल हिन्दू समाज भारत में ही द्वित्य श्रेणी का नागरिक है, उसकी कोइ भी बात मानी नहीं जाती, उसके देवी देवताओ के अभ्रद्र चित्र और चरित बनाया/बताया जा सकता है | जबकी अल्पसख्यक अन्य धर्मों/मजहबो के समाज और लोगो के साथ ऐसा दुसाहस कोइ नहीं कर सकता |
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हिंदी और अंग्रेजी पोस्टो का बुकमार्क पेजों में विभाजन 
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ABOUT ME:

A Consulting Engineer, operating from Mumbai, involved in financial and project consultancy; also involved in revival of sick establishments.

ABOUT MY BLOG: One has to accept that Hindus, though, highly religious, are not getting desired result as a society. Female feticide, lack of education for girls, dowry deaths, suicides among farmers, increase in court cases among relatives, corruption, mistrust and discontent, are all physical parameters to measure the effectiveness or success/failure of RELIGION, in a society. And all this, despite the fact, that spending on religion, by Hindus, has increased drastically after the advent of multiple TV channels. There is serious problem of attitude of every individual which need to be corrected. Revival of Hindu religion, perhaps, is the only way forward.

I am writing how problems, faced by Indian people can be sorted out by revival of Hindu Religion.