Friday, August 25, 2017

LATEST THREE POSTS AND ALL BOOKMARK WITH BIFURCATION

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मेरी हाल की तीन पोस्ट्स ~~MY RECENT THREE POSTS
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हिन्दू को कर्महीन से कर्मठ बनाने के कार्यक्रम सेजुड़े, दूसरा विकल्प है नहीं
https://awara32.blogspot.com/2017/08/make-hindu-proactive-from-passive.html 

बार बार, इस बात को दुहराया जा रहा है कि जब तक हिन्दू कर्मठ नहीं होगा, समस्याओं का समाधान नहीं होने वाला |
क्या अंतर है, कर्महीन और कर्मठ  में, समझते हैं :
// कर्म, भावना के अनुपात में अंतर होता है |
//The difference is in the ratio of KARM and BHAVNA //
कर्महीन में भावना/कर्म के अनुपात में, भावना का भाग अधिक होता है, और कर्मठ में कर्म का |
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नीचे दिए तथ्यों के आधार पर निर्णय आप स्वंम करें कि क्या धर्म व्यक्तिगत है?
https://awara32.blogspot.com/2017/08/sanatan-is-not-personal-but-society-centric.html

क्या धर्म व्यक्तिगत है?
उत्तर : बिलकुल नहीं , सिर्फ पूजा पाठ और विधि व्यक्तिगत है  |
धर्म सिर्फ सनातन में ही नहीं, पूरे विश्व में व्यक्तिगत नहीं है , और ना ही हो सकता |
नीचे दिए तथ्यों के आधार पर निर्णय आप स्वंम करें !

सिर्फ समाज को बेवकूफ बनाने के लिए और शोषण करने के लिए ही धर्मगुरु, विद्वान बार बार समाज तक इस तरह की गलत सूचना पहुचाते हैं, क्यूंकि शोषण और धंदा तो व्यक्तिगत कहने पर है, ना कि सही सूचना देने पर कि धर्म सामाजिक है !

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विद्वान परशुराम को नकारात्मक क्रोधित और घोर बदला लेते हुए क्यूँ दिखाते हैं?
https://awara32.blogspot.com/2017/07/avtar-parashram-acts-were-positive.html 

मालूम नहीं क्यूँ संस्कृत विद्वान यह पूरी तरह से गलत सूचना विष्णु अवतार, भगवान् परशुराम जी के बारे में देते है, की क्षत्रियों का उनके पिता के साथ दुर्व्यवाहर के कारण , तथा क्षत्रियों की अन्य उद्दंडता के कारण , उन्होंने इक्कीस बार पृथ्वी को सारे क्षत्रिये मार कर शत्रिय-विहीन कर दिया |

ईश्वर अवतार तो दया के सागर होते हैं, वैसे भी सनातन में यह नियम है कि मानव रूप में प्रभु सदैव यह उद्धारण प्रस्तुत करते हैं कि यदि कोइ मानव ऐसा कार्य करे कि दण्डित करना आवश्यक है, तो मानव के पास इतना ही अधिकार है कि उस व्यक्ति को इतना ही दण्ड दिया जाय जिससे समाज आगे बढ़ता जाए, ना की अपराध के अनुसार ‘उचित दण्ड’ |
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हिंदी और अंग्रेजी पोस्टो का बुकमार्क पेजों में विभाजन 
BIFURCATION OF BOOKMARK FOR ENGLISH & HINDI POSTS 
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       BIFURCATION of HINDI POSTS
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       PURANS , LORD SHIV, and IMP. HINDI SANATAN DHARM POSTS

       GENERAL and IMPORTANT HINDI POSTS

        RAMAYAN POSTS in HINDI

        MAHABHARAT POSTS IN HINDI

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BIFURCATION of ENGLISH POSTS

List of MAHABHARAT Posts in English

List of RAMAYAN Posts in English

List of GENERAl Posts in English

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ABOUT ME:

A Consulting Engineer, operating from Mumbai, involved in financial and project consultancy; also involved in revival of sick establishments.

ABOUT MY BLOG: One has to accept that Hindus, though, highly religious, are not getting desired result as a society. Female feticide, lack of education for girls, dowry deaths, suicides among farmers, increase in court cases among relatives, corruption, mistrust and discontent, are all physical parameters to measure the effectiveness or success/failure of RELIGION, in a society. And all this, despite the fact, that spending on religion, by Hindus, has increased drastically after the advent of multiple TV channels. There is serious problem of attitude of every individual which need to be corrected. Revival of Hindu religion, perhaps, is the only way forward.

I am writing how problems, faced by Indian people can be sorted out by revival of Hindu Religion.